देवरी कला में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन- क्षेत्रवासी हुए भाव-विभोर

Vikash Agrahari

Author | Updated: 06 Jan 2026, 03:55 PM IST | 1 min read
Share:

राजन गुप्ता

सदर ब्लॉक के देवरी कला ग्राम में ग्रामवासियों एवं क्षेत्रवासियों के सहयोग से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ इन दिनों पूरे क्षेत्र को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर रहा है। इस पावन आयोजन में वृन्दावन धाम से पधारीं सुप्रसिद्ध कथा व्यास पूज्य ज्ञानमती जी के मुखारविंद से बांके बिहारी लाल के दिव्य चरित्र पर आधारित अमृतमयी कथा का रसपान कर क्षेत्रवासी स्वयं को धन्य अनुभव कर रहे हैं।

New Edition

Read Today's E-Magazine

Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, प्रेम और धर्म के गूढ़ संदेशों को सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा का शुभारंभ 1 जनवरी को विधिवत पूजन-अर्चन के साथ हुआ, जबकि 7 जनवरी को हवन-पूजन एवं विशाल भंडारे के साथ कथा का भव्य विश्राम होगा।
इस अवसर पर यूथ आइकॉन सौरभ कांत पति तिवारी एवं समाजसेवी अखिलेश द्विवेदी जी ने कथा स्थल पर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती की। उन्होंने कथा व्यास पूज्य ज्ञानमती जी द्वारा प्रवाहित की जा रही इस अमृतमयी भागवत कथा को अधिक से अधिक श्रद्धालुओं द्वारा श्रवण करने का भावपूर्ण अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि तीनों लोकों के स्वामी, मदन मोहन, मुरलीधर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीला कथा सुनने का पुण्य अवसर इस क्षेत्र के लोगों को प्राप्त हो रहा है। सौरभ कांत पति तिवारी ने क्षेत्रवासियों से इस पावन आयोजन में यथासंभव सहयोग प्रदान करने की भी अपील की।

इस श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सफल आयोजन में सुरेश कुमार गुप्ता जी, राम विलास केशरी,कुलभूषण पाण्डेय,बालेन्द्र गुप्ता (अधिवक्ता), प्रदीप एवं संदीप (समस्त परिवार), परमेश्वर गुप्ता, महेन्द्र सिंह, राहुल सिंह पटेल,अर्चना द्विवेदी,विद्यवाती, सुमन केशरी,प्रमिला एवं राजेन्द्र सिंह सहित अनेक सहयोगियों एवं ग्रामवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनके सहयोग से यह आयोजन भव्य एवं अनुकरणीय बन सका।
समस्त आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों के सामूहिक प्रयास से यह धार्मिक आयोजन न केवल क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रहा है, बल्कि समाज को संस्कार, सद्भाव और भक्ति के सूत्र में भी सशक्त रूप से पिरो रहा है।