सोन संगम शक्तिनगर की तरफ से विश्व हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर विचार गोष्ठी तथा काव्य संध्या का आयोजन किया गया

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Administrator | Updated: 11 Jan 2026, 09:35 AM IST | 1 min read
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शक्तिनगर/सोनभद्र साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम शक्तिनगर की तरफ से विश्व हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर विचार गोष्ठी तथा काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि,मां ज्वालामुखी मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित श्लोकी मिश्रा रहे।कार्यक्रम की शुरुआत पूनम कुमारी तथा ज्योति कुमारी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना तथा भजन से हुई। अतिथियों का स्वागत तथा विषय की की स्थापना करते हुए डॉ मानिक चंद पांडेय ने बताया कि विश्व हिंदी दिवस 2026 का मुख्य उद्देश्य,हिंदी,पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमता,है।जिसके मूल में युवा पीढ़ी को पारंपरिक ज्ञान और तकनीक जैसे ए आई से जोड़ने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी की भूमिका एवं महत्व को प्रतिपादित करना है ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ दिनेश कुमार सोनकर असिस्टेंट प्रोफेसर कॉमर्स महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी कैंपस शक्ति नगर ने कहा कि हिंदी दुनिया की एक ऐसी भाषा है जो सभी को आपस में जोड़ के रखती है।हिंदी ही विश्व में पंचायती भाषा के रूप में स्थापित होने की क्षमता रखती है।मुख्य अतिथि के रूप में इस श्लोकी मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ,हिंदी विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है क्योंकि इसका मूल उत्स संस्कृत है और संस्कृत की कोख में कहीं न कहीं महेश्वर सूत्र है। जो हमारे आदि देव भगवान शिव के डमरू से निकला है। मुख्य वक्ता के रूप में काशी संभाग के प्रांत के प्रमुख गोपाल तिवारी ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसमें जो हम बोलते हैं वही लिखते भी हैं ।इसमें किसी तरह का कोई दिक्कत नहीं होती क्योंकि इसके स्वर और व्यंजन अपने भाव तत्व को पूर्ण करने में सक्षम है। विशिष्ट वक्ता के रूप में विवेकानंद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नरेंद्र भूषण शुक्ला ने बताया कि, विश्व में हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो दुनिया में सर्वाधिक लोगों के द्वारा व्यवहारों में देखी जाती है। क्योंकि हिंदी की विशेषता है कि हम जो बोलते हैं वही लिखते भी हैं। वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन कांटेक्ट सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया भर में हिंदी का मान सम्मान बढ़ा है। विशिष्ट वक्ता के रूप में महेंद्र तिवारी ने बताया कि ,हिंदी पूरी दुनिया में युवाओं के द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्षम भाषा के रूप में आज अपनी पहचान बन चुकी है।
अन्य वक्ताओं में राजीव कुमार श्रीवास्तव ज्योति कुमारी बद्री प्रसाद इत्यादि ने अपने विचार व्यक्त किया। काव्य संध्या की श्री गणेश गोपाल तिवारी जी के द्वारा सरस्वती वंदना कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया गया
वीणा पाणी धारिणी मराल पै विहारिणी हो
भव भय हारिणी अविद्या तम हर दो।
गजल एवं कता के लिए जाने-माने शायर बहर बनारसी ने अपनी रचना कुछ इस अंदाज में बयां किया
रूह ,आत्मा,जान है हिंदी
भारत की पहचान है हिंदी
हिंदी में है शान हमारी
कितना आलीशान है हिंदी।
युवा कवि राजीव कुमार श्रीवास्तव ने अपनी कविता लोगो के समक्ष इस तरह पेश किया
मैं भूखे नंगों बेघर की
बस पीड़ा गाने आता हूँ
मैं लोकतंत्र की अर्थी पर
बस फूल चढ़ाने आता हूँ।
अपने गीत के लिए प्रसिद्ध रमाकांत पांडे ने अपनी कविता से लोगो का मन जीत लिया
हिंदुस्तान में रहते हैं, बात हिंदी में करेंगे।
मातृभाषा हिंदी का सम्मान करेंगे।
वयो वृद्ध कवि बद्री नारायण प्रसाद ने हिंदी की अभ्यर्थना इस प्रकार किया
हिंदुस्तान की शान है हिंदी
हम सब की अभिमान है हिंदी
जन-जन की भाषा है हिंदी
भारत मां की आशा है हिंदी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ मानिक चंद पांडेय तथा धन्यवाद ज्ञापन विजय कुमार दुबे ने किया। इस कार्यक्रम में सीताराम अवधेश कुमार गुलाब सिंह हरिशंकर गुप्ता पूजा साहनी मनोरमा कुमारी संध्या कुमारी रोशनी कुमारी शिवकुमार लक्ष्मी नारायण दुबे गीता सिंह हिमांशु सूरज कुमार पवन कुमार अंकित कुमार इत्यादि लोग उपस्थित रहे राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।

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